लाल किले पर ‘केसरी झंडा’ फहराने वाले को ढाई करोड़ देगा ये संगठन

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लाल किले पर केसरी यानी खालिस्तानी झंडा फहराने वाले को 3.5 लाख डॉलर यानी तकरीबन ढाई करोड़ रुपए देने की घोषणा की गई है. किसने की? सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने. ये संगठन भारत में बैन है. अमेरिका से संचालित होता है. लगातार भड़काऊ काम करता रहता है. किसान आंदोलन में इसके शामिल होने के दावों के लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं.

सिख फॉर जस्टिस का चीफ गुरपतवंत सिंह पन्नू भारत में आतंकवादी घोषित है. उसने इस इनाम की घोषणा एक वीडियो जारी करके की. पंजाबी में रिकॉर्डेड इस विडियो में पन्नू ने कहा,

हमने रिपब्लिक डे पर लाल किले के ऊपर झंडा फहराने वाले के लिए 2.5 लाख डॉलर की घोषणा की थी, लेकिन अब हमने यह रकम बढ़ाकर 3.5 लाख डॉलर कर दी है. ‘राज करेगा खालसा’ को लेकर इससे हमारी प्रतिबद्धता बढ़ गई है.

लाल किले पर निशान साहिब का झंडा फहराए जाने के बाद भी पन्नू ने भड़काऊ वीडियो जारी किया था. इसमें वो कहता दिख रहा है कि अगर पंजाब को आजाद कर खालिस्तान बनाना है तो संसद पर भी कब्जा करना होगा.

दिल्ली पुलिस ने सिख फॉर जस्टिस और पन्नू के खिलाफ 8 जनवरी को UAPA (The Unlawful Activities Prevention Act) के तहत केस दर्ज किया था. तब SFJ ने इंडिया गेट पर केसरी झंडा लहराने वाले को 2.5 लाख डॉलर दिए जाने की बात कही थी.

NIA ने इस महीने की शुरुआत में ही सिख फॉर जस्टिस से जुड़े मामले में किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा और एक्टर दीप सिद्धू के अलावा 27 अन्य लोगों को समन भेजे थे.

अमेरिका से चलता है सिख फॉर जस्टिस

अमेरिका में बने सिख फॉर जस्टिस संगठन की शुरुआत साल 2007 में हुई थी. इसका मुख्य रूप से एजेंडा पंजाब में अलग से खालिस्तान बनाने का है. अमेरिका में वकील और पंजाब यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री ले चुका गुरपतवंत सिंह पन्नू SFJ का चेहरा है.

वह लगातार सुर्खियों में बना रहता है. सिख फॉर जस्टिस संगठन ने ही पिछले साल रेफरेंडम 2020 का आयोजन करके दुनियाभर में सिखों से शामिल होने को कहा था. इसका मकसद खालिस्तान बनाने के कैंपेन को बढ़ावा देना था. हाल में गणतंत्र दिवस से पहले हिंसा को लेकर भी गुरपतवंत सिंह ने धमकी दी थी.

भारत में क्यों बैन है SFJ?

साल 2019 में केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से सिख फॉर जस्टिस पर बैन लगाया गया था. इसकी वजह भारत में देशविरोधी कैंपेन चलाने की कोशिश बताई गई. गैरकानूनी गतिविधियां निरोधक कानून ( UAPA) के तहत ये बैन लगाया गया.

केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक, सिख फॉर जस्टिस संगठन पंजाब में लोगों को भड़काने की कोशिश करता है. दुनिया में कई जगहों पर खालिस्तान की मांग को लेकर अभियान चलाता है, भारत की छवि धूमिल करने की कोशिश करता है.